चैटजीपीटी, क्लॉड या जेमिनी में कुछ भी लिखने से पहले यह जानना जरूरी है कि स्क्रीन के पीछे क्या हो रहा है। अगर आप एआई को विकिपीडिया समझेंगे, तो इसकी गलतियां आपको नुकसान पहुंचाएंगी। अगर आप इसे ऐसा सहायक मानेंगे जो आपके दिए गए कागजों से काम करता है, तो यह बेहद मददगार साबित होगा।
सबसे आम गलती जो लोग करते हैं
ज्यादातर लोग एआई को गूगल सर्च की तरह इस्तेमाल करते हैं। वे एक सवाल पूछते हैं और मान लेते हैं कि जवाब एक जांचा-परखा सच है। देखिए तब क्या होता है जब आप बिना आंकड़े दिए कोई खास जानकारी मांगते हैं।
“सूरत से इंदौर 10 टन ट्रक का भाड़ा कितना है, और कौन सी ट्रांसपोर्ट कंपनी सबसे तेज डिलीवरी देती है?”
“सूरत से इंदौर 10 टन ट्रक का अनुमानित भाड़ा ₹18,500 से ₹22,000 है। सूरत इंदौर रोडलाइंस 14 घंटे में सबसे तेज डिलीवरी देती है और विजय नगर डिपो पर अगली सुबह अनलोडिंग की गारंटी देती है।”
यह कैसे काम करता है: किराना स्टोर का लड़का
अपने मोहल्ले के किसी किराना स्टोर के बारे में सोचिए। वहां काम करने वाला लड़का तीन साल से दुकान पर है। कोई ग्राहक आकर कहता है, 'भैया, 500 ग्राम चाय पत्ती देना।' वह ग्राहक के मांगने से पहले ही चीनी का पैकेट आगे बढ़ा देता है। क्यों? क्योंकि चाय खरीदने वाले ज्यादातर लोग चीनी भी खरीदते हैं। वह अपने अनुभव से अगले सामान का अनुमान लगा रहा है। एआई भी ठीक ऐसे ही काम करता है, बस उसने लाखों किताबों, लेखों और वेबसाइटों से सीखा है। आप उसे तीन शब्द दीजिए और वह तय करता है कि चौथा शब्द क्या होना चाहिए। उसे आपकी कंपनी या नियमों का कोई निजी ज्ञान नहीं है।
इससे हमें क्या सीखना चाहिए
भरोसेमंद लगना सच होने का सबूत नहीं है
इंसान आमतौर पर तभी पूरे आत्मविश्वास से बोलता है जब उसे पक्का पता हो। लेकिन एआई हर समय आत्मविश्वास से भरा रहता है। गलत बात को भी वह बेहतरीन व्याकरण में लिखता है। जब एआई कोई मनगढ़ंत नियम या नंबर बनाता है, तो इंजीनियर इसे मतिभ्रम कहते हैं। आपके लिए यह बस एक गलत जवाब है।
यह आपकी मेज पर रखे कागजों से काम करता है
एआई सिर्फ उसी जानकारी का सही इस्तेमाल कर सकता है जो आपने उसके सामने रखी है। इसे एक मेज समझिए। अपनी रेट लिस्ट मेज पर रखिए और वह उसी से जवाब देगा। मेज खाली छोड़ेंगे तो वह हवा में तीर चलाएगा।
शब्दों में माहिर, पर गणित में कच्चा
एआई ने भाषा सीखी है, गणित नहीं। वह जानता है कि 2 + 2 के बाद अक्सर 4 आता है क्योंकि उसने यह बार-बार देखा है। लेकिन किसी इनवॉइस के सात बड़े नंबर जोड़ने को कहिए, तो वह ऐसा जोड़ दे सकता है जो देखने में सही लगे पर असल में गलत हो। जोड़-घटाव हमेशा खुद जांचें।
एआई के साथ काम करने की चार आदतें
आप मेरे सहायक हैं। यहाँ [ग्राहक या सहकर्मी का नाम] के साथ हुई मेरी बैठक के नोट्स हैं: """ [अपने नोट्स या व्हाट्सएप मैसेज यहाँ पेस्ट करें] """ एक विनम्र फॉलो-अप ईमेल लिखें। नियम: 1. केवल ऊपर दिए गए तथ्यों, तारीखों और आंकड़ों का उपयोग करें। 2. यदि कोई महत्वपूर्ण विवरण गायब है, जैसे कोई समय सीमा या भुगतान की शर्तें, तो उसकी जगह [जांचें] लिखें। 3. ईमेल 150 शब्दों से कम रखें। कोई घिसे-पिटे जुमले न लिखें।
यह इसलिए काम करता है क्योंकि तथ्य एआई के सामने मेज पर हैं, और उसे मन से बातें भरने के बजाय खाली जगह छोड़ने का निर्देश दिया गया है।
एक सहकर्मी कहता है: 'चैटजीपीटी गूगल जैसा एक बड़ा डेटाबेस है जिसे सब कुछ पता है।' दो वाक्यों में समझाएं कि यह बात गलत क्यों है?
उत्तर देखें
गूगल इंटरनेट पर पहले से मौजूद पन्नों को ढूंढ कर लाता है। चैटजीपीटी कुछ ढूंढता नहीं है; वह पिछले शब्दों के आधार पर नए वाक्य बनाता है, इसलिए वह मनगढ़ंत बातें भी लिख सकता है जो सच लगती हैं।